शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
त्र्यंबक भैरव मंत्र
त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
प्रकारमहामृत्युंजय मंत्र / आयुवर्धक मंत्र
स्वरूपत्र्यंबक शिव/भैरव
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हम तीन नेत्रों वाले शिव की पूजा करते हैं, जो मृत्यु के बंधनों से मुक्त कर अमरता प्रदान करते हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अकाल मृत्यु से रक्षा, स्वास्थ्य लाभ
विस्तृत लाभ
अकाल मृत्यु से रक्षा, स्वास्थ्य लाभ 7।
जप काल
प्रातःकाल या प्रदोष में रुद्राक्ष माला से जप।
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र