शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भैरव मंत्र
ॐ कामराजाय नमः।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारराजसिक संपदा मंत्र
स्वरूपस्वर्णाकर्षण भैरव
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो सभी इच्छाओं के राजा और अधिपति हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
स्वर्ण-ऐश्वर्य की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
स्वर्ण-ऐश्वर्य की प्राप्ति
जप काल
शुक्रवार को यंत्र पर कुमकुम अर्पण
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ शान्ताय नमः
ज्ञात्वा शिवं शान्तिमत्यन्तमेति
ॐ ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा शिरो मे पातु सर्वतः। (स्वरूप: ह्रीं-स्वरूपा सरस्वती | लाभ: मस्तिष्क और सहस्रार चक्र की सभी दिशाओं से रक्षा | अर्थ: ह्रीं बीज रूपी सरस्वती मेरे सिर की सब ओर से रक्षा करें) 8
ॐ कादम्बिन्यै नमः
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे॥
प्रनवउँ पवनकुमार खल बन पावक ग्यान घन। जासु हृदय आगार बसहिं राम सर चाप धर॥