शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
त्रिकालाग्नि भैरव मंत्र
ऐं ह्रीं श्रीं क्रौं हौं ह्रूं क्षूं त्रिकालाग्नि भैरवाय क्षूं ह्रूं हौं क्रौं श्रीं ह्रीं ऐं नमः।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारअघोर अग्नि मंत्र
स्वरूपत्रिकालाग्नि भैरव
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
त्रिकालाग्नि भैरव को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
त्रिकाल के पापों का दहन और ऊर्जा जागरण
विस्तृत लाभ
त्रिकाल के पापों का दहन और ऊर्जा जागरण 7।
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