शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भागवत अष्टदश अध्याय महामंत्र
ॐ नमो भगवते नरसिंहाय नमस्तेजस्तेजसे आविराविर्भव वज्रनख वज्रदंष्ट्र कर्माशयान् रन्धय रन्धय तमो ग्रस ग्रस ॐ स्वाहा। अभयमभयमात्मनि भूयिष्ठा ॐ क्ष्रौम्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारपौराणिक महामंत्र
स्वरूपप्रह्लाद-रक्षक उग्र रूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हे तेजस्वियों के तेज! प्रकट हों, प्रकट हों! हे वज्रनख! हे वज्रदंष्ट्र! मेरे कर्म-संस्कारों को भस्म करें, मेरे अज्ञान को ग्रस लें। ॐ स्वाहा। मेरे हृदय में अभय का संचार करें। ॐ क्ष्रौम्।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
सकाम कर्मों की वासना का शमन, हृदय के अज्ञान (अंधकार) का नाश और परम निर्भयता की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
सकाम कर्मों की वासना का शमन, हृदय के अज्ञान (अंधकार) का नाश और परम निर्भयता की प्राप्ति।
जप काल
ध्यान के समय, विशेषकर नरसिंह जयंती के दिन या घोर विपत्ति में तीव्र मानसिक जप।
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