शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
वैदिक महामृत्युंजय मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारसंजीवनी / संरक्षण / मोक्ष मंत्र
स्वरूपत्र्यंबक शिव (रुद्र)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हम त्रिनेत्रधारी भगवान शिव की पूजा करते हैं, जो सुगंधित हैं और सभी जीवों का पोषण करते हैं। जैसे पका हुआ खरबूजा बेल के बंधन से स्वतः मुक्त हो जाता है, वैसे ही वे हमें मृत्यु से मुक्त कर अमरता प्रदान करें 13।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अकाल मृत्यु के भय से रक्षा, गंभीर रोगों का नाश, जीवन शक्ति (Prana) में वृद्धि एवं मोक्ष प्राप्ति
विस्तृत लाभ
अकाल मृत्यु के भय से रक्षा, गंभीर रोगों का नाश, जीवन शक्ति (Prana) में वृद्धि एवं मोक्ष प्राप्ति 3।
जप काल
सोमवार, श्रावण मास, महाशिवरात्रि, या रोग-शय्या पर रुद्राभिषेक के समय।
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