शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
अघोर अस्त्र मंत्र
अघोरेभ्योऽथ घोरेभ्यो घोरघोरतरीभ्यश्च। सर्वतः शर्व सर्वेभ्यो नमस्ते रुद्ररूपेभ्यः॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारअघोर मंत्र / वैदिक-आगमिक संरक्षण मंत्र
स्वरूपअघोर भैरव / स्वच्छंद भैरव
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
हे शिव! आपके जो रूप अघोर (शांत), घोर (भयंकर) और घोरतर हैं, उन सभी को सर्वत्र नमस्कार है 22।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
मोक्ष की प्राप्ति, मृत्यु के भय का नाश, और चेतना का ऊर्ध्वगमन
विस्तृत लाभ
मोक्ष की प्राप्ति, मृत्यु के भय का नाश, और चेतना का ऊर्ध्वगमन 22।
जप काल
प्रदोष काल या मध्यरात्रि। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जपने का विधान 23।
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