संहार भैरव मंत्र (उत्तर-पूर्व दिशा)
ॐ नमो भगवते संहार भैरवाय भूत प्रेत पिशाच ब्रह्म राक्षसान् उच्चाटय उच्चाटय संहारय संहारय सर्व भय छेदनं कुरु कुरु स्वाहा।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हे संहार भैरव, सभी भूतों-राक्षसों का उच्चाटन व संहार करें।
इस मंत्र से क्या होगा?
पूर्व जन्म के बुरे कर्मों का शमन, प्रेत-बाधा का उच्चाटन
विस्तृत लाभ
पूर्व जन्म के बुरे कर्मों का शमन, प्रेत-बाधा का उच्चाटन 25।
जप काल
श्वान वाहन का ध्यान करते हुए ईशान कोण में 1008 बार तांत्रिक जप 26।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ शान्तायै नमः
ॐ ह्रीं श्रीं त्र्यक्षरो मन्त्रो नैर्ऋत्यां मे सदाऽवतु। (अर्थ: त्र्यक्षरी मन्त्र नैऋत्य कोण में रक्षा करे) 8
ॐ निरामयाय नमः
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये त्रिलोकात्मा तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ नमः प्रणवार्थाय प्रणवार्थविधायिने । प्रणवाक्षरबीजाय प्रणवाय नमो नमः ॥
ॐ हृदयं योगिसाध्यश्च निवासं पातु मे हरिः