ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

स्वर्णाकर्षण भैरव महामंत्र

ॐ ऐं ह्रीं श्रीं आपदुद्धारणाय ह्रां ह्रीं ह्रूं अजामिलबद्धाय लोकेश्वराय स्वर्णाकर्षणभैरवाय मम दारिद्र्य विद्वेषणाय महाभैरवाय नमः श्रीं ह्रीं ऐं।

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

जप काउंटर लोड हो रहा है...

प्रकारस्वर्णाकर्षण भैरव महामंत्र / संपदा एवं राजसिक मंत्र
स्वरूपस्वर्णाकर्षण भैरव
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

आपत्तियों का नाश करने वाले, संपूर्ण लोक के ईश्वर स्वर्णाकर्षण भैरव को नमस्कार है। वे मेरी दरिद्रता का नाश करें।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

भारी कर्ज से मुक्ति, स्वर्ण-ऐश्वर्य की प्राप्ति, दरिद्रता का समूल नाश

विस्तृत लाभ

भारी कर्ज से मुक्ति, स्वर्ण-ऐश्वर्य की प्राप्ति, दरिद्रता का समूल नाश 4।

जप काल

शुक्रवार या भैरवाष्टमी को, स्वर्ण या स्फटिक यंत्र के सम्मुख 4।

इसे भी पढ़ें

अन्य देवताओं के मंत्र

प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र