स्वर्णाकर्षण भैरव महामंत्र
ॐ ऐं ह्रीं श्रीं आपदुद्धारणाय ह्रां ह्रीं ह्रूं अजामिलबद्धाय लोकेश्वराय स्वर्णाकर्षणभैरवाय मम दारिद्र्य विद्वेषणाय महाभैरवाय नमः श्रीं ह्रीं ऐं।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
इस मंत्र का अर्थ
आपत्तियों का नाश करने वाले, संपूर्ण लोक के ईश्वर स्वर्णाकर्षण भैरव को नमस्कार है। वे मेरी दरिद्रता का नाश करें।
इस मंत्र से क्या होगा?
भारी कर्ज से मुक्ति, स्वर्ण-ऐश्वर्य की प्राप्ति, दरिद्रता का समूल नाश
विस्तृत लाभ
भारी कर्ज से मुक्ति, स्वर्ण-ऐश्वर्य की प्राप्ति, दरिद्रता का समूल नाश 4।
जप काल
शुक्रवार या भैरवाष्टमी को, स्वर्ण या स्फटिक यंत्र के सम्मुख 4।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ महारावणमर्धनाय नमः
ॐ द्विवर्णाय नमः
ॐ पुरुषाय नमः
ऐमित्येकाक्षरो मन्त्रो मम कण्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: एकाक्षरी बीज | लाभ: कंठ, स्वर-तंत्र और विशुद्धि चक्र की रक्षा, संगीतकारों के लिए अति उत्तम | अर्थ: 'ऐं' रूपी एकाक्षर मन्त्र मेरे कंठ की सदा रक्षा करे) 8
ॐ चामुण्डे जय जय वश्यकरि सर्व सत्त्वानामः स्वाहा
ॐ बाणासुरकरान्तकाय नमः