शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भैरव मंत्र
ॐ अध्यात्मयोगकुशलाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपयोग निपुण
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो योग, ध्यान और आत्मविद्या में परम कुशल और निपुण हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
योग सिद्धि
विस्तृत लाभ
योग सिद्धि
जप काल
योग से पूर्व
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ कच्छपेशाय विद्महे महाकूर्माय धीमहि तन्नो कूर्मः प्रचोदयात्।
ॐ श्री हनुमते नमः॥
ॐ ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा शिरो मे पातु सर्वतः। (स्वरूप: ह्रीं-स्वरूपा सरस्वती | लाभ: मस्तिष्क और सहस्रार चक्र की सभी दिशाओं से रक्षा | अर्थ: ह्रीं बीज रूपी सरस्वती मेरे सिर की सब ओर से रक्षा करें) 8
ॐ दैत्यदानवभञ्जनाय नमः
ॐ प्राणशक्त्यै नमः
ॐ प्राज्ञाय नमः