देवी सूक्त मंत्र - 5
अहमेव स्वयमिदं वदामि जुष्टं देवेभिरुत मानुषेभिः। यं कामये तं तमुग्रं कृणोमि तं ब्रह्माणं तमृषिं तं सुमेधाम्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
देवों और मनुष्यों द्वारा सेवनीय इस तत्त्व का मैं स्वयं उपदेश करती हूँ। मैं जिस पर प्रसन्न होती हूँ, उसे श्रेष्ठ बना देती हूँ—उसे ब्रह्मा, ऋषि या परम ज्ञानी बना देती हूँ 1।
इस मंत्र से क्या होगा?
मेधा, बुद्धि, उच्च पद और ईश्वरीय कृपा की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
मेधा, बुद्धि, उच्च पद और ईश्वरीय कृपा की प्राप्ति 1।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ नमो भगवते पंचवदनाय ऊर्ध्व मुखे। हयग्रीवाय सकल जन वशीकरणाय स्वाहा॥
जो महर्षि भृगु के पवित्र वंश को आनंदित करने वाले हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: कुल-गोत्र की वृद्धि) 19।
सीता राम हनुमंत राम सीता हनुमंत (Sita Rama Hanumantha Rama Sita Hanumantha)
स्वदन्त पाशाङ्कुश रत्नपात्रं करैर्दधानो हरिनीलगात्रः । रक्तांशुको रत्नकिरीटमाली भूत्यै सदा मे द्विमुखो गणेशः ॥
ॐ विश्वस्मै नमः
ॐ श्रीकृष्णमहिष्यै नमः