शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
कालभैरवाष्टकम् - मंत्र 7
अट्टहासभिन्नपद्मजाण्डकोशसन्ततिं दृष्टिपातनष्टपापजालमुग्रशासनम्।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारस्तोत्र-मंत्र
स्वरूपकाल भैरव
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनके अट्टहास से ब्रह्मा का ब्रह्मांड कांपता है, उन उग्र शासक को नमन है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अष्ट-सिद्धियों की प्राप्ति और पाप-जाल का शमन
विस्तृत लाभ
अष्ट-सिद्धियों की प्राप्ति और पाप-जाल का शमन 36।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
सिन्दूराभमिभाननं त्रिनयनं च पाशाङ्कुशौ बिभ्राणं मधुमत्कपालमनिशं साद्विन्दुमौलिं भजे । पुष्ट्या श्लिष्टतनुं ध्वजाग्रकरया पद्मोल्लसद्धस्तया तद्योन्याहितपाणिमात्तवसुमत पात्रोल्लसत्पुष्करम् ॥
ॐ साधकप्रियकारिण्यै नमः
ॐ इन्द्राय नमः
ॐ अहर्पतये नमः
ॐ फाल्गुनसखाय नमः