शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भैरव मंत्र
ॐ चतुर्भुजायै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
चार भुजाओं वाली (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष प्रदायिनी) देवी को नमन 16।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
अग्रतश्चतुरो वेदान् पृष्ठतः सशरं धनुः। उभाभ्यां च समर्थोऽहं शापादपि शरादपि॥
त्वं गुणत्रयातीतः ॥ त्वं देहत्रयातीतः ॥ त्वं कालत्रयातीतः ॥ त्वं मूलाधारस्थितोऽसि नित्यम् ॥ त्वं शक्तित्रयात्मकः ॥ त्वां योगिनो ध्यायन्ति नित्यम् ॥
राम कथा सुंदर कर तारी। संसय बिहग उड़ावनिहारी॥
कृष्णाय वासुदेवाय हरये परमात्मने प्रणतक्लेशनाशाय
ॐ दुर्गमेश्वर्यै नमः
ॐ श्मशानवासिने नमः।