ॐ दामोदराय विद्महे रुक्मिणीवल्लभाय धीमहि तन्नो कृष्णः प्रचोदयात् ॥
ॐ दामोदराय विद्महे रुक्मिणीवल्लभाय धीमहि तन्नो कृष्णः प्रचोदयात् ॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हम दामोदर का ध्यान करते हैं, रुक्मिणी-वल्लभ का चिन्तन करते हैं। वे कृष्ण हमारी प्रज्ञा को जाग्रत करें 20।
इस मंत्र से क्या होगा?
दुःखों का निवारण, आत्मिक बल, सुखी दाम्पत्य जीवन और पारिवारिक शान्ति
विस्तृत लाभ
दुःखों का निवारण, आत्मिक बल, सुखी दाम्पत्य जीवन और पारिवारिक शान्ति 14।
जप काल
सन्ध्या-वन्दन के समय या वैवाहिक जीवन में शान्ति हेतु विशेष अनुष्ठान के रूप में।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
आलिङ्ग्य देवीं हरितां निषण्णां परस्परश्लिष्ट कटौ निविश्य । सन्ध्यारुणं पाशसृणीं वहन्तं भयापहं शक्ति गणपतिमीडे ॥
ॐ कूर्चबीजजपप्रीतायै नमः
जिन्होंने धर्म-विरोधी आतातायी क्षत्रियों पर विजय प्राप्त की, उन्हें नमस्कार। (लाभ: प्रतिस्पर्धियों पर विजय) 19।
बालग्रहाभिभूतानां बालानां शान्तिकारकम्। सङ्घातभेदे च नृणां मैत्रीकरणमुत्तमम्॥ 17
क्लीं रामाय नमः
ॐ चतुर्बाहवे नमः