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शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

दरिद्रता नाशक (स्वप्न सिद्धि) मंत्र

दुर्गे देवि नमस्तुभ्यं सर्वकामार्थसाधिके। मम सिद्धिमसिद्धिं वा स्वप्ने सर्वं प्रदर्शय॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारसिद्ध सम्पुट / स्वप्न-सिद्धि मंत्र
स्वरूपदुर्गा
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

हे सभी कामनाओं और अर्थ को सिद्ध करने वाली दुर्गे देवी! आपको नमस्कार है। मेरा कार्य सिद्ध होगा या नहीं, यह सब मुझे स्वप्न में प्रदर्शित करें।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

भविष्य का ज्ञान, स्वप्न के माध्यम से कार्य-सिद्धि या असिद्धि का संकेत प्राप्त करना

विस्तृत लाभ

भविष्य का ज्ञान, स्वप्न के माध्यम से कार्य-सिद्धि या असिद्धि का संकेत प्राप्त करना 36।

जप काल

रात्रि शयन से पूर्व हाथ-पैर धोकर 108 बार जप कर सोएं।

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