शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
प्रज्ञा विवर्धन स्तोत्र
गाङ्गेयस्ताम्रचूडश्च ब्रह्मचारी शिखिध्वजः । तारकारिरुमापुत्रः क्रौञ्चारिश्च षडाननः ॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारश्लोक 2
स्वरूपगांगेय / ब्रह्मचारी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
गांगेय, ताम्रचूड़, ब्रह्मचारी, शिखिध्वज, तारकासुर-शत्रु, उमापुत्र, क्रौंच-शत्रु और षडानन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
विद्या में सफलता और ब्रह्मचर्य की रक्षा
विस्तृत लाभ
विद्या में सफलता और ब्रह्मचर्य की रक्षा।
जप काल
विद्यारम्भ के समय।
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