भैरव मंत्र
ॐ ह्रीं राधिकायै नमः / ॐ राधायै स्वाहा।
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जिस प्रकार भ्रमरी तमाल वृक्ष का आश्रय लेती है, उसी प्रकार श्री हरि के शरीर का आश्रय लेने वाली मंगल-देवता लक्ष्मी की कृपा-दृष्टि मेरे लिए मंगलदायिनी हो। *
इस मंत्र से क्या होगा?
प्रेम, करुणा और सर्वोच्च भक्ति
ब्रह्मवैवर्त पुराण (प्रकृति खंड) के अनुसार राधा ही मूल-प्रकृति और साक्षात् महालक्ष्मी हैं, जो कृष्ण की ह्लादिनी शक्ति हैं
विस्तृत लाभ
प्रेम, करुणा और सर्वोच्च भक्ति। ब्रह्मवैवर्त पुराण (प्रकृति खंड) के अनुसार राधा ही मूल-प्रकृति और साक्षात् महालक्ष्मी हैं, जो कृष्ण की ह्लादिनी शक्ति हैं 55।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ज्ञानाश्रयाय नमः
ॐ स्थाणवे नमः
ॐ कमलप्रियायै नमः
ॐ अन्तर्याम्यै नमः
ॐ मुष्टिकासुरचाणूरमल्लयुद्धविशारदाय नमः
इडा देवहूर्मनुर्यज्ञनीर्बृहस्पतिरुक्थामदानि शंसिषद् विश्वेदेवाः सूक्तवाचः पृथिविमातर्मा मा हिंसीर्मधु मनिष्ये मधु जनिष्ये मधु वक्ष्यामि मधु वदिष्यामि मधुमतीं देवेभ्यो वाचमुद्यासँशुश्रूषेण्यां मनुष्येभ्यस्तं मा देवा अवन्तु शोभायै पितरोऽनुमदन्तु॥