शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भार्गव कवच (इष्ट-निष्ठा)
जामदग्न्यः परं यस्य दैवतं भृत्यवत्सलः। नित्यं परश्वधभृतः कवचस्यास्य धारणात्॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारकवच-मंत्र
स्वरूपपरशु-धारी, भृत्यवत्सल (भक्त-प्रेमी)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो अपने भक्तों पर सदा कृपा करने वाले हैं, वे जमदग्निनंदन ही जिसके परम देवता हैं, और जो नित्य फरसा धारण करने वाले उन प्रभु के इस कवच को धारण करता है... (अगले मंत्र से जुड़ा)।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
इष्ट देव (भगवान परशुराम) का प्रत्यक्ष सान्निध्य और उनकी विशेष कृपा
विस्तृत लाभ
इष्ट देव (भगवान परशुराम) का प्रत्यक्ष सान्निध्य और उनकी विशेष कृपा।
जप काल
नित्य कवच धारण/पाठ।
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