भार्गव कवच (प्रारंभ एवं शिव-पार्वती संवाद)
कैलासशिखरे रम्ये शंकरं लोकशंकरम्। पार्वत्युवाच- त्वत्तः श्रुतान्यशेषाणि जामदग्न्यस्य साम्प्रतम्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
इस मंत्र का अर्थ
रमणीय कैलाश शिखर पर लोकों का कल्याण करने वाले भगवान शंकर जी से पार्वती जी ने कहा: "हे नाथ! मैंने आपसे जमदग्नि-पुत्र (परशुराम) के सभी वृत्तांत सुने हैं।"
इस मंत्र से क्या होगा?
शिव-पार्वती संवाद के स्मरण से कवच की आधिभौतिक सिद्धि
विस्तृत लाभ
शिव-पार्वती संवाद के स्मरण से कवच की आधिभौतिक सिद्धि।
जप काल
कवच पाठ के आरंभ में विनियोग के रूप में।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
विद्याः समस्तास्तव देवि भेदाः स्त्रियः समस्ताः सकला जगत्सु। त्वयैकया पूरितमम्बयैतत् का ते स्तुतिः स्तव्यपरा परोक्तिः॥
ॐ महोदराय नमः
त्वं गुणत्रयातीतः ॥ त्वं देहत्रयातीतः ॥ त्वं कालत्रयातीतः ॥ त्वं मूलाधारस्थितोऽसि नित्यम् ॥ त्वं शक्तित्रयात्मकः ॥ त्वां योगिनो ध्यायन्ति नित्यम् ॥
ॐ सह नाववतु। सह नौ भुनक्तु। सह वीर्यं करवावहै।
ॐ श्रीं ह्रीं चामुण्डायै नमः
ॐ मारणाय नमः।