शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भैरव मंत्र
ॐ कक्षौ श्रीकान्तवल्लभा पातु।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकाररक्षा कवच मंत्र;
स्वरूपश्रीकान्तवल्लभा
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
श्रीकांत (कृष्ण) की वल्लभा मेरे कक्षों की रक्षा करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अंग: कक्ष (बगल/Waist) की रक्षा
विस्तृत लाभ
अंग: कक्ष (बगल/Waist) की रक्षा।
टिप्पणी
इस कवच के मंत्रों को न्यास (शरीर के अंगों को स्पर्श करते हुए) के रूप में जपा जाता है।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
धृत पाशाङ्कुश कल्पलता स्वरदश्च बीजपूरयुतः । शशिशकल कलितमौली त्रिलोचनोऽरुणश्च गजवदनः ॥ भासुरभूषण दीप्तो बृहदुदर पद्म विष्टरोल्लसितः । विघ्नपयोधरपवनः करधृत कमलः सदास्तु भूत्यै ॥
ॐ ह्रीं हूं हां ग्रें क्षों क्रों नमः॥
ॐ विनीतात्मने नमः
ॐ गोविन्दायै नमः
ॐ त्रिवर्णाय नमः
प्रणवः पातु मे कण्ठं स्कन्धौ मे पञ्चवक्त्रकः