शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भैरव मंत्र
ॐ कलावत्यै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारआद्या काली नाम-मंत्र
स्वरूपआद्या काली
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
सम्पूर्ण 64 कलाओं से परिपूर्ण और उनकी स्वामिनी देवी।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
कला और सृजनात्मक कार्यों में निपुणता
विस्तृत लाभ
कला और सृजनात्मक कार्यों में निपुणता।
जप काल
नित्य उपासना, शिवरात्रि या अमावस्या की मध्यरात्रि में रुद्राक्ष या मुण्ड माला से जप।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ अपारगुणसागरायै नमः
ॐ वीरघ्नाय नमः
ॐ दृप्ताय नमः
प्रनवउँ पवनकुमार खल बन पावक ग्यान घन। जासु हृदय आगार बसहिं राम सर चाप धर॥
ॐ जयिने नमः
व्यक्ताव्यक्तगिरः सर्वे वेदाद्या व्याहरन्ति याम्। सर्वकामदुघा धेनुः सा मां पातु सरस्वती॥ सौः देवीं वाचमजनयन्त देवास्ता विश्वरूपाः पशवो वदन्ति। सा नो मन्द्रेषमूर्जं दुहाना धेनुर्वागस्मानुपसुष्टुतैतु॥