शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भैरव मंत्र
ॐ कमलोद्भवायै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
क्षीरसागर में कमल से प्रकट हुई देवी को नमन।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ क्ष्रौम् भगवते नरसिंहाय नमः
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
ॐ कुलपद्मिन्यै नमः
ॐ वीरभद्राय नमः
अवतु माम् ॥ अवतु वक्तारम् ॥ अवतु श्रोतारम् ॥ अवतु दातारम् ॥ अवतु धातारम् ॥ अवानूचानमव शिष्यम् ॥ अव पश्चात्तात् ॥ अव पुरस्तात् ॥ अवोत्तरात्तात् ॥ अव दक्षिणात्तात् ॥ अव चोर्ध्वात्तात् ॥ अवाधरात्तात् ॥ सर्वतो मां पाहि पाहि समन्तात् ॥
दोर्भिर्युक्ता चतुर्भिः स्फटिकमणिनिभैरक्षमालान्दधाना। हस्तेनैकेन पद्मं सितमपि च शुकं पुस्तकं चापरेण॥ भासा कुन्देन्दुशङ्खस्फटिकमणिनिभा भासमानाऽसमाना। सा मे वाग्देवतेयं निवसतु वदने सर्वदा सुप्रसन्ना॥