महर्षि-वंदित परशुराम
महेन्द्रे वै गिरिश्रेष्ठे रामं नित्यम् उपासते। ऋषयो वेदविदुषो गन्धर्वाप्सरसस्तथा॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
इस मंत्र का अर्थ
पर्वतों में श्रेष्ठ महेंद्र पर्वत पर, वेदों के ज्ञाता ऋषिगण, गंधर्व और अप्सराएँ नित्य भगवान परशुराम की उपासना करते हैं।
इस मंत्र से क्या होगा?
वेदों के ज्ञान में रुचि और सत्संग की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
वेदों के ज्ञान में रुचि और सत्संग की प्राप्ति।
जप काल
प्रातःकालीन नित्य पूजा में।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
योगीश्वरो महासेनः कार्तिकेयोऽग्निनन्दनः । स्कन्दः कुमारः सेनानीः स्वामी शङ्करसम्भवः ॥
ॐ परात्परतरायै नमः
ॐ त्रिगुणात्मकाय नमः
भानुकोटिभास्वरं भवाब्धितारकं परं नीलकण्ठमीप्सितार्थदायकं त्रिलोचनम्।
इडा देवहूर्मनुर्यज्ञनीर्बृहस्पतिरुक्थामदानि शंसिषद् विश्वेदेवाः सूक्तवाचः पृथिविमातर्मा मा हिंसीर्मधु मनिष्ये मधु जनिष्ये मधु वक्ष्यामि मधु वदिष्यामि मधुमतीं देवेभ्यो वाचमुद्यासँशुश्रूषेण्यां मनुष्येभ्यस्तं मा देवा अवन्तु शोभायै पितरोऽनुमदन्तु॥
ॐ निर्लेपाय नमः