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शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

ध्यान एवं वंदना मंत्र

मनोजवम् मारुततुल्यवेगम् जितेन्द्रियम् बुद्धिमताम् वरिष्ठम्। वातात्मजम् वानरयूथमुख्यम् श्रीरामदूतम् शरणम् प्रपद्ये॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारध्यान / वंदना मंत्र
स्वरूपश्रीरामदूत
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

जो मन के समान तीव्र गति वाले, वायु के समान वेग वाले, अपनी सभी इंद्रियों को जीतने वाले, बुद्धिमानों में सर्वश्रेष्ठ, वायु के पुत्र और वानर सेना के सेनापति हैं, उन श्रीरामदूत की मैं शरण लेता हूँ।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

मानसिक शांति, चंचलता पर नियंत्रण, ज्ञान की प्राप्ति और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण

विस्तृत लाभ

मानसिक शांति, चंचलता पर नियंत्रण, ज्ञान की प्राप्ति और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण 24।

जप काल

किसी भी हनुमान साधना, रामायण पाठ या पूजा के आरंभ में हाथ जोड़कर ध्यान करते हुए।

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