शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भैरव मंत्र
ॐ नाभिं मे पातु नरहरिः स्वनाभिब्रह्मसंस्तुतः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
स्वरूपनाभि / स्रष्टा स्वरूप
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जिनकी नाभि से उत्पन्न ब्रह्मा उनकी स्तुति करते हैं, वे नरहरि मेरी नाभि की रक्षा करें।
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ह्रीं बटुकाय मम भूत भविष्यं दर्शय दर्शय बटुकाय ह्रीं ॐ स्वाहा।
ॐ ऐं क्लीं सौः।
ॐ धनधान्यकर्यै नमः
ॐ रामाय रामभद्राय रामचन्द्राय वेधसे रघुनाथाय नाथाय सीतायाः पतये नमः
ॐ कृपालवे नमः
ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे। ॐ ग्लौं हुं क्लीं जूं सः ज्वालय ज्वालय ज्वल ज्वल प्रज्वल प्रज्वल ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे ज्वल हं सं लं क्षं फट् स्वाहा॥