अथर्वशीर्ष मूल तत्त्व मंत्र
ॐ नमस्ते गणपतये ॥ त्वमेव प्रत्यक्षं तत्त्वमसि ॥ त्वमेव केवलं कर्ताऽसि ॥ त्वमेव केवलं धर्ताऽसि ॥ त्वमेव केवलं हर्ताऽसि ॥ त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि ॥ त्वं साक्षादात्माऽसि नित्यम् ॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हे गणपति, आपको नमस्कार है। आप ही प्रत्यक्ष तत्त्व हैं, आप ही एकमात्र कर्ता, धर्ता और हर्ता हैं। आप ही यह संपूर्ण ब्रह्मांड हैं और आप ही नित्य आत्मा हैं।
इस मंत्र से क्या होगा?
आत्मज्ञान, आध्यात्मिक सिद्धि और परब्रह्म-साक्षात्कार की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
आत्मज्ञान, आध्यात्मिक सिद्धि और परब्रह्म-साक्षात्कार की प्राप्ति।
जप काल
मानसिक शांति और ध्यान की गहराई में प्रवेश करते समय।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
सर्वसुगन्धिसुलेपितलिङ्गं बुद्धिविवर्धनकारणलिङ्गम्। सिद्धसुरासुरवन्दितलिङ्गं तत् प्रणमामि सदाशिवलिङ्गम्॥
ॐ संसारवैरिणे नमः
ॐ निर्गुणायै नमः
जो अत्यंत तेजस्वी और महाप्रतापी हैं, उन्हें नमस्कार। (लाभ: व्यक्तित्व में तेज और ओज की वृद्धि) 19।
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये अष्टदिक्पालाः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ सीतारामपादुकासेवायै नमः