शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भैरव मंत्र
नारायणाद् ब्रह्मा जायते। नारायणाद् रुद्रो जायते।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारसृष्टि उत्पत्ति मंत्र
स्वरूपकारण-ब्रह्म नारायण
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
नारायण से ही ब्रह्मा का जन्म होता है, नारायण से ही रुद्र उत्पन्न होते हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
सृष्टिकर्ता के प्रति पूर्ण समर्पण भाव की उत्पत्ति और अहंकार का नाश
विस्तृत लाभ
सृष्टिकर्ता के प्रति पूर्ण समर्पण भाव की उत्पत्ति और अहंकार का नाश 2।
जप काल
दार्शनिक साधना और स्वाध्याय के समय।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ अहं रुद्रेभिर्वसुभिश्चराम्यहमादित्यैरुत विश्वदेवैः। अहं मित्रावरुणोभा बिभर्म्यहमिन्द्राग्नी अहमश्विनोभा॥
ॐ महामात्रे नमः
प्रबिसि नगर कीजै सब काजा। हृदयँ राखि कोसलपुर राजा॥
ॐ वज्रनखाय विद्महे तीक्ष्णदंष्ट्राय धीमहि। तन्नो नारसिंहः प्रचोदयात्॥
शरजन्मा गणाधीश पूर्वजो मुक्तिमार्गकृत् । सर्वागमप्रणेता च वाञ्छितार्थप्रदर्शनः ॥
ॐ साधकप्राणायै नमः