शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भैरव मंत्र
ॐ परमात्मने नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपपरमात्मा
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो सभी जीवों के हृदय में स्थित अंतरात्मा (परमात्मा) हैं, उन्हें नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
ध्यान अवस्था में आत्म-तत्त्व का बोध
02
"मैं शरीर नहीं, आत्मा हूँ" का अनुभव
विस्तृत लाभ
ध्यान अवस्था में आत्म-तत्त्व का बोध; "मैं शरीर नहीं, आत्मा हूँ" का अनुभव।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
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ॐ विष्णुपत्न्यै नमः ॐ प्रसन्नाक्ष्यै नमः ॐ नारायणसमाश्रितायै नमः।
ॐ सर्वदेवेषाय नमः।
ॐ गोवर्धनधनप्रियायै नमः
काली कराली च मनोजवा च सुलोहिता या च सुधूम्रवर्णा। स्फुलिङ्गिनी विश्वरुची च देवी लेलायमाना इति सप्त जिह्वाः॥
पाशाङ्कुशौ दन्त जम्बू दधानः स्फटिकप्रभः । रक्तांशुकः गणपतिः मुदे स्याद् ऋणमोचकः ॥