परशुराम मूल/बीज मंत्र
ॐ रां रां ॐ रां रां परशुहस्ताय नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
'ॐ' और अग्नि-बीज 'रां' से युक्त, जिनके हाथों में परशु (फरसा) सुशोभित है, उन भगवान परशुराम को मेरा नमस्कार है।
इस मंत्र से क्या होगा?
उच्च बौद्धिक क्षमता का विकास, शत्रुओं पर अजेय विजय, वाक्-विकारों (वाणी दोष) का शमन और अटूट साहस की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
उच्च बौद्धिक क्षमता का विकास, शत्रुओं पर अजेय विजय, वाक्-विकारों (वाणी दोष) का शमन और अटूट साहस की प्राप्ति।
जप काल
प्रातःकाल, स्नानोपरांत 45 दिनों तक नित्य 108 बार जप। रुद्राक्ष की माला उत्तम है।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ महावीराय नमः।
आलिङ्ग्य देवीं हरितां निषण्णां परस्परश्लिष्ट कटौ निविश्य । सन्ध्यारुणं पाशसृणीं वहन्तं भयापहं शक्ति गणपतिमीडे ॥
ॐ विशाखाय नमः
ॐ कृषाणवे नमः
ॐ वाचं वाणी सदा पातु।
ॐ नमो आदेश गुरु को, सोने का कड़ा, तांबे का कड़ा, हनुमान वनगरेया सजे मोंढे आन खड़ा। शब्द सांचा पिंड काचा, फुरो मंत्र ईश्वरो वाचा।