शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भैरव मंत्र
ॐ सर्वज्ञाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपसर्वज्ञ
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो तीनों कालों की प्रत्येक बात का पूर्ण ज्ञान रखते हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
ज्ञान
विस्तृत लाभ
ज्ञान
जप काल
विद्यारंभ
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
पाशाङ्कुश स्वदन्त आम्र फलवान् आखुवाहनः । विघ्नान् निहन्तु रक्तवर्णो विनायकः ॥
ॐ नवव्याकृतपण्डिताय नमः
ॐ सर्वदोषनिषूदिन्यै नमः
बुद्धिविच्छिन्नचैतन्यमेकं पूर्णमथापरम्। आभासत्वपरं बिम्बभूतमेवं त्रिधा चितिः॥
ॐ इन्दिरायै नमः
मखेश्वरि क्रियेश्वरि स्वधेश्वरि सुरेश्वरि त्रिवेदभारतीश्वरि प्रमाणशासनेश्वरि। रमेश्वरि क्षमेश्वरि प्रमोदकाननेश्वरि व्रजेश्वरि व्रजाधिपे श्रीराधिके नमोऽस्तु ते॥