ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
शास्त्रीय पौराणिक मंत्र

सर्व-व्यापकता मंत्र

सर्वं जगदिदं त्वत्तो जायते ॥ सर्वं जगदिदं त्वत्तस्तिष्ठति ॥ सर्वं जगदिदं त्वयि लयमेष्यति ॥ सर्वं जगदिदं त्वयि प्रत्येति ॥ त्वं भूमिरापोऽनलोऽनिलो नभः ॥ त्वं चत्वारि वाक्पदानि ॥

साधना मंडल

जप, संकल्प और उपासना संकेत

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प्रकारसृष्टिकर्ता मंत्र
स्वरूपमहागणपति (सृष्टिकर्ता)
अर्थ एवं भावार्थ

इस मंत्र का अर्थ

यह संपूर्ण जगत आपसे उत्पन्न होता है, आपमें ही स्थित है, और अंततः आपमें ही विलीन हो जाएगा। आप ही पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश हैं। आप ही वाणी के चार रूप हैं।

लाभ एक दृष्टि में

इस मंत्र से क्या होगा?

01

प्रकृति के पंचतत्त्वों और ईश्वर के मध्य सामंजस्य की अनुभूति

विस्तृत लाभ

प्रकृति के पंचतत्त्वों और ईश्वर के मध्य सामंजस्य की अनुभूति।

जप काल

योग साधना और पंचतत्त्व ध्यान के दौरान।

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