भैरव मंत्र
ॐ सीताशोकविनाशनाय नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जिन्होंने अशोक वाटिका में माता सीता के शोक का विनाश किया, उन्हें नमस्कार है।
इस मंत्र से क्या होगा?
शयन के समय, प्रातः जागने पर और विशेषकर यात्रा के दौरान इनका जप करने से व्यक्ति अकाल-मृत्यु के भय से मुक्त होता है, राजद्वारे (कोर्ट-कचहरी) में विजयी होता है और उसे समस्त संपत्तियों की प्राप्ति होती है
विस्तृत लाभ
शयन के समय, प्रातः जागने पर और विशेषकर यात्रा के दौरान इनका जप करने से व्यक्ति अकाल-मृत्यु के भय से मुक्त होता है, राजद्वारे (कोर्ट-कचहरी) में विजयी होता है और उसे समस्त संपत्तियों की प्राप्ति होती है 35।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
अङ्गं हरेः पुलकभूषणमाश्रयन्ती भृङ्गाङ्गनेव मुकुलाभरणं तमालम्। अङ्गीकृताखिलविभूतिरपाङ्गलीला माङ्गल्यदास्तु मम मङ्गलदेवतायाः॥
श्रीहरिः पातु ते वक्त्रं मस्तकं मधुसूदनः । श्रीकृष्णश्चक्षुषी पातु नासिकां राधिकापतिः ॥
ॐ महोदराय नमः
ॐ दुर्गदारिण्यै नमः
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये जनकनन्दिनी तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ खर्पराशिने नमः।