भैरव मंत्र
ॐ श्रीमन्मन्दकटाक्षलब्धविभवब्रह्मेन्द्रगङ्गाधरां, त्वां त्रैलोक्यकुटुम्बिनीं सरसिजां वन्दे मुकुन्दप्रियाम्॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
जिनके एक मंद कटाक्ष (कृपा-दृष्टि) से ब्रह्मा, इन्द्र और शिव वैभव प्राप्त करते हैं, उन त्रैलोक्य को अपना कुटुंब मानने वाली, कमल पर विराजने वाली मुकुंद-प्रिया की मैं वंदना करता हूँ।
इस मंत्र से क्या होगा?
ब्रह्मांडीय चेतना और सर्वोच्च ऐश्वर्य की अनुभूति
विस्तृत लाभ
ब्रह्मांडीय चेतना और सर्वोच्च ऐश्वर्य की अनुभूति।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सर्वजनेश्वर्यै नमः
ॐ कंसमोहाय नमः
ॐ भावनाय नमः
ॐ भारत्यै नमः
इडा देवहूर्मनुर्यज्ञनीर्बृहस्पतिरुक्थामदानि शंसिषद् विश्वेदेवाः सूक्तवाचः पृथिविमातर्मा मा हिंसीर्मधु मनिष्ये मधु जनिष्ये मधु वक्ष्यामि मधु वदिष्यामि मधुमतीं देवेभ्यो वाचमुद्यासँशुश्रूषेण्यां मनुष्येभ्यस्तं मा देवा अवन्तु शोभायै पितरोऽनुमदन्तु॥
ॐ वरप्रदायै नमः