शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भैरव मंत्र
ॐ श्रीमते नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपश्री-सम्पन्न
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
समस्त ऐश्वर्य, शोभा और अष्ट-सिद्धियों से युक्त भगवान को नमन।
जप काल
नित्य प्रातः काल, लाल आसन पर बैठकर रुद्राक्ष या लाल चंदन की माला से 108 नामों का क्रमशः उच्चारण करते हुए पुष्प अर्पित करें।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
नैऋत्ये क्रोध भैरवाय नमः नैऋत्ये मां रक्ष रक्ष काल कंटकान् भक्ष भक्ष आवाहयाम्यहं इत्र तिष्ठ तिष्ठ हुं फट् स्वाहा।
ॐ सत्त्वगुणाश्रयायै नमः
सर्वं जगदिदं त्वत्तो जायते ॥ सर्वं जगदिदं त्वत्तस्तिष्ठति ॥ सर्वं जगदिदं त्वयि लयमेष्यति ॥ सर्वं जगदिदं त्वयि प्रत्येति ॥ त्वं भूमिरापोऽनलोऽनिलो नभः ॥ त्वं चत्वारि वाक्पदानि ॥
ॐ उदाराङ्गायै नमः
ॐ अजिताय नमः
ॐ मत्स्यरूपाय नमः