शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
पिङ्गल रुद्र मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं सर्व मङ्गलाय पिङ्गलाय ॐ नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारतांत्रिक कल्याण मंत्र
स्वरूपपिंगल रुद्र
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
श्रीं और ह्रीं शक्ति बीजों से युक्त, सर्वमंगलकारी पिंगल रुद्र को मेरा नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
सर्वमंगल, सौभाग्य और भौतिक-आध्यात्मिक समृद्धि की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
सर्वमंगल, सौभाग्य और भौतिक-आध्यात्मिक समृद्धि की प्राप्ति 25।
जप काल
शुभ कार्यों के आरंभ में या सोमवार को।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ह्रीं विद्याधिष्ठातृदेव्यै स्वाहा ओष्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: विद्याधिष्ठात्री | लाभ: होठों और उच्चारण स्थान की रक्षा | अर्थ: विद्या की अधिष्ठात्री देवी मेरे होंठों की सदा रक्षा करें) 8
ॐ घोररूपाय नमः।
ॐ पद्मसुन्दर्यै नमः
इतो नृसिंहः परतो नृसिंहो यतो यतो यामि ततो नृसिंहः। बहिर्नृसिंहो हृदये नृसिंहो नृसिंहमादिं शरणं प्रपद्ये॥
ॐ अकल्मषाय नमः
ॐ सुग्रीवेप्सितराजदाय नमः