शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भैरव मंत्र
ॐ त्रिभङ्गिललिताकृतये नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-जप मन्त्र; ये मन्त्र वासुदेव, बाल-गोपाल, और द्वारकाधीश स्वरूपों का पूर्ण प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपत्रिभंगी ललित
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
त्रिभंगी (तीन जगह से मुड़ी हुई) सुन्दर आकृति वाले को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
कला और सौन्दर्य हेतु
विस्तृत लाभ
कला और सौन्दर्य हेतु
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
नितम्बबिम्बरुलम्बमानपुष्पमेखले प्रशस्तरलकिङ्किणीकलापमध्यमञ्जुले। करीन्द्रशुण्डदण्डिकாவरोहसौभगोरुके कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
ॐ शिरो मे विष्णुपत्नी च ललाटं अमृतोद्भवा। चक्षुषी सुविशालाक्षी श्रवणे सागरम्बुजा॥
ॐ ऐं नमः शारदे श्रीं शुद्धे नमः शारदे ऐं वद वद वाग्वादिनि स्वाहा
ॐ उन्मत्ताय नमः
वाजश्च मे प्रसवश्च मे प्रयतिश्च मे प्रसितिश्च मे धीतिश्च मे क्रतुश्च मे...
ॐ मुनये नमः