शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भार्गव दर्शन स्तुति
उपस्पृश्य महेन्द्राद्रौ रामं दृष्ट्वाभिवाद्य च।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारतीर्थ-दर्शन मंत्र
स्वरूपगुरु परशुराम
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
(भगवान बलराम ने) महेंद्र पर्वत पर स्नान/आचमन करके भगवान परशुराम के दर्शन किए और उन्हें अभिवादन (प्रणाम) किया।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
तीर्थ यात्रा का पूर्ण फल एवं सद्गुरु का सान्निध्य
विस्तृत लाभ
तीर्थ यात्रा का पूर्ण फल एवं सद्गुरु का सान्निध्य।
जप काल
महेंद्रगिरि या किसी पवित्र तीर्थ के दर्शन के समय।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
नमः शम्भवाय च मयोभवाय च नमः शङ्कराय च मयस्कराय च नमः शिवाय च शिवतराय च।
ॐ कोलाहलाय नमः
ॐ ह्रीं क्लीं वाण्यै स्वाहेति मम पृष्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: वाणी | लाभ: पीठ और मेरुदंड की रक्षा | अर्थ: वाणी मेरी पीठ की सदा रक्षा करें) 8
ॐ सर्वराजगृहेस्थितायै नमः
रक्षत्वसौ माध्वनि यज्ञकल्पः स्वदंष्ट्रयोद्धृतधरो वराहः
ॐ शूलपाणये नमः।