शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भैरव मंत्र
ॐ वाग्मिने नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-मंत्र
स्वरूपवाक्-सिद्ध
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जो उत्कृष्ट वक्ता और वेदों की व्याख्या करने वाले हैं।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
वाणी में ओज
विस्तृत लाभ
वाणी में ओज
जप काल
नित्य
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
हरिद्रां चतुर्बाहुं हरिद्रावदनं प्रभुम् । पाशाङ्कुशधरं देवं मोदकं दन्तमेव च ॥ भक्ताभयप्रदातारं वन्दे विघ्नविनाशनम् ॥
ॐ शतकोटिरविप्रभाय नमः
ॐ प्राज्ञाय नमः
ॐ ह्रीं बटुकाय मम पूर्ण तंत्र सिद्धिं कुरु कुरु बटुकाय ह्रीं ॐ नमः शिवाय।
ॐ भ्रूयुगं शशिशोभना पातु।
स्फुरन्मौलि कल्लोलिनी चारु गङ्गा। लसद्भालबालेन्दु कण्ठे भुजङ्गा॥