भैरव मंत्र
ॐ वासुदेवाय नमः
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
इस मंत्र का अर्थ
मैं सभी गुणों से परिपूर्ण प्रथम व्यूह वासुदेव को नमन करता हूँ।
इस मंत्र से क्या होगा?
ज्ञान, बल, ऐश्वर्य, वीर्य, शक्ति और तेज—इन छह गुणों की पूर्णता और परब्रह्म की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
ज्ञान, बल, ऐश्वर्य, वीर्य, शक्ति और तेज—इन छह गुणों की पूर्णता और परब्रह्म की प्राप्ति 9।
जप काल
पाञ्चरात्र दीक्षा या मंदिर अर्चना के समय।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ ह्रां ह्रीं ॐ नमो भगवते महा-वीर-वीराय सर्वदुःख निवारणाय ग्रहमण्डल सर्वभूतमण्डल सर्व-पिशाच-मण्डलोच्चाटन भूत-ज्वर एकाहिक-ज्वर द्वयाहिक-ज्वर त्र्याहिक-ज्वर चातुर्थिक-ज्वर संताप-ज्वर विषम-ज्वर ताप-ज्वर माहेश्वर-वैष्णव-ज्वरान् छिन्दि-छिन्दि यक्ष ब्रह्मराक्षस भूत-प्रेत-पिशाचान् उच्चाटय-उच्चाटय स्वाहा।
ॐ सर्वज्ञाय नमः।
ॐ नं रीं नित्यतृप्तधाम्ने तत्पुरुषात्मने तर्जनीभ्यां नमः
ॐ योगहृत्पद्मनिलयायै नमः
ॐ शान्ताय नमः
ॐ सर्वगतायै नमः