अघोर अस्त्र मंत्र
अघोरेभ्योऽथ घोरेभ्यो घोरघोरतरीभ्यश्च। सर्वतः शर्व सर्वेभ्यो नमस्ते रुद्ररूपेभ्यः॥
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हे शिव! आपके जो रूप अघोर (शांत), घोर (भयंकर) और घोरतर हैं, उन सभी को सर्वत्र नमस्कार है 22।
इस मंत्र से क्या होगा?
मोक्ष की प्राप्ति, मृत्यु के भय का नाश, और चेतना का ऊर्ध्वगमन
विस्तृत लाभ
मोक्ष की प्राप्ति, मृत्यु के भय का नाश, और चेतना का ऊर्ध्वगमन 22।
जप काल
प्रदोष काल या मध्यरात्रि। दक्षिण दिशा की ओर मुख करके जपने का विधान 23।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ साधकप्रियकारिण्यै नमः
ऐमित्येकाक्षरो मन्त्रो मम कण्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: एकाक्षरी बीज | लाभ: कंठ, स्वर-तंत्र और विशुद्धि चक्र की रक्षा, संगीतकारों के लिए अति उत्तम | अर्थ: 'ऐं' रूपी एकाक्षर मन्त्र मेरे कंठ की सदा रक्षा करे) 8
ॐ चन्द्रवदनायै नमः
ॐ वृषाङ्काय नमः
ॐ सीताशोकविनाशनाय नमः
ॐ रामाय हुं फट् स्वाहा