शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
भद्रकाल्यै नमो नित्यं (आदि शंकराचार्य कृत)
भद्रकाल्यै नमो नित्यं सरस्वत्यै नमो नमः। वेदवेदाङ्गवेदान्तविद्यास्थानेभ्य एव च॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारशारदा स्तोत्र मन्त्र
स्वरूपभद्रकाली-सरस्वती
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
भद्रकाली और सरस्वती को नित्य नमस्कार है। वेद, वेदांग, वेदांत और विद्या के सभी स्थानों को नमस्कार है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
वेदांत दर्शन और शास्त्रों को समझने की क्षमता का विकास
विस्तृत लाभ
वेदांत दर्शन और शास्त्रों को समझने की क्षमता का विकास।
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ॐ धनहारिणे नमः।
तमीश्वराणां परमं महेश्वरं तं देवतानां परमं च दैवतम्
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ॐ राजराजेश्वरीपुत्राय नमः
श्रीमत्तीक्ष्ण शिखाङ्कुशाक्षवरदान् दक्षे दधानः करैः पञ्चामृतपूर्णकुम्भमभयं वामे दधानो मुदा । पीठ स्वर्णमयारविन्दविलसत् सत्कर्णिका भासुरे आसीनस्त्रिमुखः पलाशरुचिरो नागाननः पातु नः ॥
दयासुदृष्टिं कुरुतां मयि श्रीः! सुवर्णदृष्टिं कुरु मे गृहे श्रीः॥