शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ दुर्गा मंत्र
ॐ भारद्वाजस्तुताय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
जप काउंटर लोड हो रहा है...
स्वरूपऋषि-स्तुत
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
महर्षि भारद्वाज द्वारा वंदित देव को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
प्राचीन ऋषियों के सूक्ष्म ज्ञान की प्राप्ति
विस्तृत लाभ
प्राचीन ऋषियों के सूक्ष्म ज्ञान की प्राप्ति।
इसे भी पढ़ें
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
वागीशा यस्य वदने लक्ष्मीर्यस्य च वक्षसि। यस्यास्ते हृदये संवित् तं नृसिंहमहं भजे॥
ॐ परमपुरुषाय नमः
अशोकवृक्षवल्लरीवितानमण्डपस्थिते प्रवालबालपल्लवप्रभारुणाङ्घ्रिकोमले। वराभयस्फुरत्करे प्रभूतसम्पदालये कदा करिष्यसीह मां कृपाकटाक्षभाजनम्॥
ॐ नारायणाय विद्महे वासुदेवाय धीमहि तन्नो विष्णुः प्रचोदयात्।
ॐ शुभायै नमः
ॐ नमस्ते गणपतये ॥ त्वमेव प्रत्यक्षं तत्त्वमसि ॥ त्वमेव केवलं कर्ताऽसि ॥ त्वमेव केवलं धर्ताऽसि ॥ त्वमेव केवलं हर्ताऽसि ॥ त्वमेव सर्वं खल्विदं ब्रह्मासि ॥ त्वं साक्षादात्माऽसि नित्यम् ॥