शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
काली एकाक्षरी बीज मंत्र
ॐ क्रीं
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारबीज मंत्र
स्वरूपआद्या काली
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
'क' अर्थात् पूर्ण ज्ञान, 'र' अर्थात् शुभत्व, 'ई' अर्थात् वरदान देने वाली और 'बिंदु (ं)' दुःख-नाशक है।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
समस्त बुरी शक्तियों से रक्षा
विस्तृत लाभ
समस्त बुरी शक्तियों से रक्षा।
जप काल
गुरु दीक्षा के उपरांत नित्य मानसिक जप।
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वेल् वेल् वेत्रिवेल् मुरुगनुक्कु अरोहरा
ॐ वर्णाश्रमगुरवे नमः
त्वं ब्रह्मा त्वं विष्णुस्त्वं रुद्रस्त्वमिन्द्रस्त्वमग्निस्त्वं वायुस्त्वं सूर्यस्त्वं चन्द्रमास्त्वं ब्रह्मभूर्भुवःस्वरोम् ॥
ॐ प्रह्लादपालकाय नमः
ॐ ह्रीं सरस्वत्यै स्वाहा शिरो मे पातु सर्वतः। (स्वरूप: ह्रीं-स्वरूपा सरस्वती | लाभ: मस्तिष्क और सहस्रार चक्र की सभी दिशाओं से रक्षा | अर्थ: ह्रीं बीज रूपी सरस्वती मेरे सिर की सब ओर से रक्षा करें) 8
ॐ अक्षहन्त्रे नमः