शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
वराह गायत्री मंत्र
ॐ भूवराहाय विद्महे हिरण्याक्षहराय धीमहि तन्नो वराहः प्रचोदयात्।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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स्वरूपभू-रक्षक वराह
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
संपत्ति और भूमि से संबंधित विवादों से मुक्ति
विस्तृत लाभ
संपत्ति और भूमि से संबंधित विवादों से मुक्ति 69।
जप काल
भूमि-पूजन के समय।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ कल्याणप्रकृतये नमः
ॐ ह्रीं क्लीं वाण्यै स्वाहेति मम पृष्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: वाणी | लाभ: पीठ और मेरुदंड की रक्षा | अर्थ: वाणी मेरी पीठ की सदा रक्षा करें) 8
ॐ कपालपात्रसन्तुष्टायै नमः
ॐ अन्नपूर्णायै नमः
ॐ निर्विकाराय नमः।
पक्वचूत फलकल्प मञ्जरीमिक्षुदण्ड तिलमोदकैः सह । उद्वहन् परशु हस्त ते नमः श्रीसमृद्धिपतये देव पिङ्गल ॥