श्री परशुराम गायत्री मंत्र (प्रथम पाठ)
ॐ ब्रह्मक्षत्राय विद्महे क्षत्रियान्ताय धीमहि तन्नो रामः प्रचोदयात्
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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इस मंत्र का अर्थ
हम उन ब्रह्म-क्षत्रिय (ब्राह्मण कुल में उत्पन्न क्षात्र धर्म पालक) स्वरूप को जानते हैं, उन आतातायी क्षत्रियों के विनाशक का हम ध्यान करते हैं। वे भगवान राम (भार्गव राम) हमारी बुद्धि को सन्मार्ग पर प्रेरित करें।
इस मंत्र से क्या होगा?
नेतृत्व क्षमता में असाधारण वृद्धि, जीवन और आजीविका में उच्च स्तर की प्राप्ति, तथा नकारात्मक ऊर्जा का समूल नाश
विस्तृत लाभ
नेतृत्व क्षमता में असाधारण वृद्धि, जीवन और आजीविका में उच्च स्तर की प्राप्ति, तथा नकारात्मक ऊर्जा का समूल नाश।
जप काल
प्रातः एवं सांध्यकाल (संध्या वंदन के समय), कुशा के आसन पर बैठकर जपें।
अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ अत्रिसुतायै नमः
ॐ सूर्यज्योतिषे नमः
ॐ श्रीं ह्रीं भगवत्यै स्वाहा नेत्रयुग्मं सदाऽवतु। (स्वरूप: भगवती | लाभ: नेत्रों और सूक्ष्म दृष्टि की रक्षा | अर्थ: श्रीं ह्रीं स्वरूपा भगवती मेरे दोनों नेत्रों की रक्षा करें) 8
तेन स तत्क्षणादेव तुष्टा दत्ते महावरम्। येन पश्यति नेत्राभ्यां तत्प्रियं श्यामसुन्दरम्॥
ॐ परस्मै ज्योतिषे नमः
ॐ जलशायिने नमः