शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
गणेश मूल एकाक्षरी बीज
ॐ गं नमः (अथवा केवल 'गं')
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारबीज मंत्र
स्वरूपमूल गणेश
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
स्रोत स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं (बीजाक्षर का शाब्दिक अर्थ नहीं होता, यह ध्वनि विज्ञान है)।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
सर्व-संकट निवारण और कुंडलिनी ध्यान में गहराई
विस्तृत लाभ
सर्व-संकट निवारण और कुंडलिनी ध्यान में गहराई।
जप काल
श्वास-प्रश्वास के साथ मानसिक जप।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं धान्य लक्ष्म्यै नमः।
ॐ महादेवाय नमः
ऐमित्येकाक्षरो मन्त्रो मम कण्ठं सदाऽवतु। (स्वरूप: एकाक्षरी बीज | लाभ: कंठ, स्वर-तंत्र और विशुद्धि चक्र की रक्षा, संगीतकारों के लिए अति उत्तम | अर्थ: 'ऐं' रूपी एकाक्षर मन्त्र मेरे कंठ की सदा रक्षा करे) 8
ॐ शरभाय नमः
ॐ अकिञ्चनवरप्रदायै नमः
ॐ भवरोगहन्त्रे नमः