शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ दुर्गा मंत्र
ॐ जलक्रीडासमासक्तगोपीवस्त्रापहारकाय नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारनाम-जप मन्त्र; ये मन्त्र वासुदेव, बाल-गोपाल, और द्वारकाधीश स्वरूपों का पूर्ण प्रतिनिधित्व करते हैं।
स्वरूपचीर-हारी
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
जलक्रीड़ा में आसक्त गोपियों के वस्त्रों का हरण करने वाले को नमस्कार।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
भौतिक आवरण से मुक्ति
विस्तृत लाभ
भौतिक आवरण से मुक्ति
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ स्तम्भजाय नमः
शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं
ॐ नं रीं नित्यतृप्तधाम्ने तत्पुरुषात्मने तर्जनीभ्यां नमः
ॐ करञ्जफलभूषाढ्यायै नमः
कर्दमेन प्रजाभूता मयि सम्भव कर्दम। श्रियं वासय मे कुले मातरं पद्ममालिनीम्॥
ॐ शृतं मे मा प्रहासीः अनेनाधीतेनाहोरात्रान्सन्दधामि ऋतं वदिष्यामि सत्यं वदिष्यामि। तन्मामवतु तद्वक्तारमवतु अवतु मामवतु वक्तारमवतु वक्तारम्। ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः॥