शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ दुर्गा मंत्र
ॐ कक्षौ श्रीकान्तवल्लभा पातु।
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकाररक्षा कवच मंत्र;
स्वरूपश्रीकान्तवल्लभा
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
श्रीकांत (कृष्ण) की वल्लभा मेरे कक्षों की रक्षा करें।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
अंग: कक्ष (बगल/Waist) की रक्षा
विस्तृत लाभ
अंग: कक्ष (बगल/Waist) की रक्षा।
टिप्पणी
इस कवच के मंत्रों को न्यास (शरीर के अंगों को स्पर्श करते हुए) के रूप में जपा जाता है।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ सुदिनायै नमः
ॐ वेदान्तसारसन्दोहाय नमः
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ॐ दामोदराय विद्महे रुक्मिणीवल्लभाय धीमहि तन्नो कृष्णः प्रचोदयात् ॥
अवतु माम् ॥ अवतु वक्तारम् ॥ अवतु श्रोतारम् ॥ अवतु दातारम् ॥ अवतु धातारम् ॥ अवानूचानमव शिष्यम् ॥ अव पश्चात्तात् ॥ अव पुरस्तात् ॥ अवोत्तरात्तात् ॥ अव दक्षिणात्तात् ॥ अव चोर्ध्वात्तात् ॥ अवाधरात्तात् ॥ सर्वतो मां पाहि पाहि समन्तात् ॥
ॐ अव्ययाय नमः