शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
परशुराम द्वि-अक्षरी बीज मंत्र
ॐ रां रां
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारबीज मंत्र
स्वरूपभृगुवंशी परशुराम (अग्नि-तेज स्वरूप)
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
अग्नि और शक्ति के बीज रूप, परब्रह्म स्वरूप भगवान परशुराम को नमन।
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
ध्यान में तीव्र एकाग्रता की प्राप्ति और कुंडलिनी शक्ति के जागरण में सहायक
विस्तृत लाभ
ध्यान में तीव्र एकाग्रता की प्राप्ति और कुंडलिनी शक्ति के जागरण में सहायक।
जप काल
किसी भी समय मानसिक जप (अजपा जाप)।
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प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
ॐ विश्वहराय नमः
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये ओङ्कारः तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
वीरभद्राय अतिक्रूराय रुद्रकोप सम्भवाय सर्वदुष्ट निवर्हणाय हुं फट् स्वाहा।
ॐ गोवर्धनवरप्रदाय नमः
रक्षत्वसौ माध्वनि यज्ञकल्पः स्वदंष्ट्रयोद्धृतधरो वराहः