शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ दुर्गा मंत्र
ॐ सर्वगतायै नमः
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारशतनाम मंत्र |
स्वरूपआदिशक्ति भवानी |
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
सब जगह (सर्वत्र) व्याप्त रहने वाली
लाभ एक दृष्टि में
इस मंत्र से क्या होगा?
01
सर्वांगीण विकास एवं दरिद्रता नाश)
विस्तृत लाभ
सर्वांगीण विकास एवं दरिद्रता नाश)
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
न श्रुतं कवचं देव न चोक्तं भवता मम। इति पृष्टः स गिरिशो मन्त्रयन्त्राङ्गतत्त्ववित्॥
गजेन्द्रवदनं साक्षाच्चलकर्ण सुचामरम् । हेमवर्णं चतुर्बाहुं पाशाङ्कुशधरं वरम् ॥ स्वदन्तं दक्षिणे हस्ते सव्ये त्वाम्रफलं तथा । पुष्करे मोदकं चैव धारयन्तमनुस्मरेत् ॥
ॐ यो वै रामचन्द्रः स भगवान् ये पञ्चमहाभूतानि तस्मै वै नमो नमः भूर्भुवः स्वः
ॐ चन्द्रावली पातु गण्डं।
एको हि रुद्रो न द्वितीयाय तस्थुर् य इमांल्लोकानीशत ईशनीभिः।
ॐ वासुदेवाय नमः