शास्त्रीय पौराणिक मंत्र
माँ कूष्माण्डा ध्यान मंत्र
सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेव च। दधाना हस्तपद्माभ्यां कूष्माण्डा शुभदास्तु मे॥
साधना मंडल
जप, संकल्प और उपासना संकेत
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प्रकारध्यान मंत्र
अर्थ एवं भावार्थ
इस मंत्र का अर्थ
अपने हस्त-कमलों में अमृत से भरा कलश और रुधिर कलश धारण करने वाली माँ कूष्माण्डा मेरे लिए कल्याणकारी हों 17।
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अन्य देवताओं के मंत्र
प्रत्येक देवता का एक चुनिंदा मंत्र
तां म आवह जातवेदो लक्ष्मीमनपगामिनीम्। यस्यां हिरण्यं विन्देयं गामश्वं पुरुषानहम्॥
श्रीमत्तीक्ष्ण शिखाङ्कुशाक्षवरदान् दक्षे दधानः करैः पञ्चामृतपूर्णकुम्भमभयं वामे दधानो मुदा । पीठ स्वर्णमयारविन्दविलसत् सत्कर्णिका भासुरे आसीनस्त्रिमुखः पलाशरुचिरो नागाननः पातु नः ॥
ॐ कवचिने नमः
ॐ शक्तिपाणिमते नमः
ॐ श्रीविष्णवे नमः
ॐ नारसिंह-वपुषे नमः